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शनिवार, 14 जनवरी 2012

वृक्षों का महत्त्व

प्रकृति प्रेम ही पर्यावरण की सुरक्षा का मूल मंत्र है | इस मंत्र को जन जन तक पहुचने , इसका आदर करने या यु कहे की प्रदुषण फैलने से रोकने के लिए हमारे ऋषि - मुनियों ने वृक्षों - लता , पशु पक्षिओ आदि को न सिर्फ देवी देवताओ का नाम दिया , बल्कि नव ग्रहों को खुश करने के लिए इनकी पूजा करने व् इन्हें चारा डालने की प्रथा भी बनाई | भारतीय समाज में पेड़ पौधो को लेकर अनेक मान्यताए है | ऐसी मान्यता है की पीपल के वृक्ष पर ३३ करोड़ देवी - देवताओ का वास है | अत : लोग पीपल के पेड़ की पूजा करते है | इसकी मूल वजह यह भी है की पीपल का वृक्ष रात को ऑक्सीजन छोड़ता है | जो प्राणी मात्र के लिए आवश्यक है | इसे प्राण वायु भी कहते है | अत : हमारे ऋषि मुनियों ने पीपल की सुरक्षा के लिए न सिर्फ उस पर ३३ करोड़ देवी - देवताओ का वास होना बताया बल्कि शनि की शांति के लिए उसकी पूजा व् परिक्रमा करने , उस पर धागा लपेटने आदि का विधान भी बनाया | इस वजह से लोग पीपल को पूजते है और इसको कटाने से डरते है | कहा जाता है की घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए , क्यों की इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते है | तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है | घर में तुलसी लगाने की मूल वजह यह है की भारत में वर्षा ज्यादा होती है इस वजह से मलेरिया भी ज्यादा होता है | मलेरिया की मूल वजह मच्छर है और वैज्ञानिको ने यह साबित कर दिया है की जहा तुलसी का पौधा होता है वहा मलेरिया का मच्छर नहीं रहता है | अर्थात तुलसी की पूजा करने से मलेरिया से हमारी और पूजा करने से तुलसी के पौधे की , दोनों की रक्षा होती है | कहा जाता है कि बरगद के वृक्ष पर भुत प्रेतों का वास होता है | अत : इसे घर के आस पास नहीं होना चाहिए | हालाँकि इसके पीछे मूल अवधारणा यह है की बरगद का वृक्ष बहुत घना होता है , अत : कोई व्यक्ति उस पर छिप सकता है और अँधेरा होने पर नुकसान पंहुचा सकता है | पीपल व् बरगद के पत्ते चौड़े होते है | पत्तियों के चौड़े होने के कारण फोटोसिन्थेसिस के लिए इन्हें बहुत अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है | अत : इनकी जड़े जल प्राप्त करने के लिए आसपास के भवनों के नीचे नीव को तोड़ती हुई दूर तक निकल जाती है और उसकी नीव कमजोर पड़ जाती है | इस वजह से भवन के आसपास इन्हें लगाने की सलाह नहीं दी जाती , लेकिन इनसे मिलाने वाली ऑक्सीजन से हम वंचित न रह जाये , इसलिए इनकी पूजा करने , इनके नीचे अधिक समय तक रहने , इनके १०८ बार चक्कर लगाकर सूत बांधने व् अन्य कर्म करने का विधान है | इनके आलावा तुलसी , नीम आदि को भी शुभ माना गया है | सच तो यह है की प्रकृति की कोई भी वनस्पति अनुपयोगी नहीं है | फलदार वृक्षों को आँगन में लगाना अशुभ माना गया है | इसकी वजह यह है की फलो को तोड़ने के लिए बच्चे पेड़ पर चढ़ कर गिर सकते है | पत्थर मारकर शीशे तोड़ सकते है | अत : विश्वकर्मा प्रकाश व् वास्तु शास्त्र कि अन्य पुस्तकों में फलदार वृक्षों को आँगन के लिए अशुभ माना गया है | भवन के पास बेल लगाने कि सलाह भी नहीं दी जाती , क्योकि इनके सहारे साप , बिच्छु , रेंगने वाले कीड़े , चूहे आदि जहरीले जंतु घर में पहुचकर नुकसान पंहुचा सकते है | दूध वाले पौधे भी अशुभ होते है , क्योकि दूध जहरीला होता है और आँखों को नष्ट कर सकता है | शयन कक्ष में भी पौधो को लगाने की सलाह नहीं दी जाती , क्यों की रात को वे कार्बन डा इ ओक्साईड छोड़ते है , जिससे वहा रहने वालो का स्वास्थ्य बिगड़ता है | भवन या परिसर में पौधो को उचित दिशा लगाना जरुरी है | उत्तर , पूर्व और उत्तर-पूर्व में छोटे पौधे लगाने चाहिए , ताकि सूर्य के प्रकाश के मार्ग में कोई रूकावट न आये व् सूर्य से मिलाने वाली ऊर्जा तथा विटामिन ए , डी आदि हमें भरपूर मात्रा में मिले | बड़े व् विशाल वृक्षों को दक्षिण , पश्चिम व् दक्षिण - पश्चिम में लगाना चाहिए , ताकि हम दोपहर बाद भवन पर पड़ने वाली हानिकारक किरणों से बच सके